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बिहार ने देश और दुनिया को क्या-क्या दिया | बिहार की उपलब्धियां

बिहार ने देश और दुनिया को क्या-क्या दिया

आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे, बिहार ने देश और दुनिया को क्या-क्या दिया। यह सब इतिहास के पन्नों पर दर्ज है और आप गर्व के साथ कह सकते हैं, हमारे देश का एक पिछड़ा राज्य जिसने दुनियाभर में अपने कारनामें से लोगों को चौंका दिए।

जब भी बिहार की बातें आज देश के किसी राज्यों में होती है। तो बिहार को एक अलग पहचान दिया जाता है। लोग बिहार के लोगों को अनाप- सनाप बोल कर चिढ़ाते हैं। जिसके चलते बिहारी लोग दूसरे राज्यों में रहकर भी लोगों से कटे-कटे रहना पसंद करते हैं। बिहार इस देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शीर्ष पर है। इसका वर्तमान जितना स्याह है उतना ही उज्जवल था इसका अतीत, राजनीति और सामाजिक समस्याओं के कारण अपनी अपनी हालत पर तरस खा रहे बिहार को सबसे अधिक राहत अपनी थाती को देखकर ही होती है।

आइए इस पोस्ट में मैं आपको कुछ बिहार से परिचय कराती हूँ। बिहार की उपलब्धियां जानकर आपको भी बिहार पर गर्व होगा।

बिहार ने देश और दुनिया को क्या-क्या दिया

सबसे पहले मैं बिहार ने देश और दुनिया को क्या-क्या दिया इसी बारें बताती हूँ ।

  • 1. दुनियां का सबसे पहला गणतंत्र बिहार बना : दुनिया में सबसे पहला गणतंत्र ( Republic ) का तमगा बिहार के वैशाली के पास है। भगवान महावीर की जन्म स्थली एवं भगवान बुद्ध की कर्म भूमि वैशाली एक पवित्र स्थल है। वैशाली जिले में स्थित एक गांव है। यहां की मुख्य भाषा ‘वज्जिका’ है। पुरातत्‍व विभाग के प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि वैशाली में ही दुनिया का सबसे पहला गणतंत्र कायम किया गया था।
  • 2.जैन धर्म और बौद्ध धर्म का जन्म बिहार में ही हुआ : दुनिया के दो धर्म बिहार से ही निकले। बौद्ध धर्म और जैन धर्म भारत के दो प्राचीन धर्म हैं, आज दुनिया में यह धर्म फैली है। जिनकी जन्मस्थली उस वक़्त का मगध ( वर्तमान समय का बिहार ) है तथा दोनों ही धर्म आज भी फल-फूल रहे हैं। जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर स्वामी तथा बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध दोनों समकालिक माने जाते हैं।
  • 3.दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी बिहार में ही स्थापित हुई थी : दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी नालंदा यूनिवर्सिटी बिहार में ही स्थापित हुई थी ! इस विश्वविद्यालय में 12वीं शताब्दी में करीब तीन हजार विद्यार्थी अध्ययन करते थे। यह विवि व्याकरण, तर्कशास्त्र, मानव शरीर रचना विज्ञान, शब्द ज्ञान, चित्रकला सहित अनेक विधाओं का अंतरराष्ट्रीय केंद्र था। इतिहासकारों के मुताबिक नालंदा यूनिवर्सिटी के सबसे प्रतिभाशाली भिक्षु दीपांकर को माना जाता है। जिन्होंने करीब दो सौ पुस्तकों की रचना की थी। एक लुटेरे बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को जला कर इसके अस्तित्व को पूरी तरह नष्ट कर दिया था।
  • 4.आचार्य चाणक्य बिहार के ही रहने वाले थे: दुनिया को राजनीत‍ि व कूटनीति का पाठ पढ़ाने वाले चाणक्य बिहार के ही रहने वाले थे। आचार्य चाणक्य ने महाराजा धनानंद से अखण्ड भारत की बात की और कहा कि वह पोरव राष्ट्र से यमन शासक सेल्युकस को भगा दे किन्तु धनानंद ने नकार दिया। क्योंकि पोरस राष्ट्र के राजा की हत्या धनानंद ने यमन शासक सेल्युकस से करवाई थी। उन्होंने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को सिंहासन पर बिठाया और अखंड भारत का निर्माण किये।
  • 5.रामायण लिखने वाले वाल्मी‍कि‍ भी बिहार से थे : महर्षि वाल्मीकि जी को प्राचीन वैदिक काल के महान ऋषियों कि श्रेणी में प्रमुख स्थान प्राप्त हैं। वह संस्कृत भाषा के आदि कवि तथा आदि काव्य ‘रामायण’ के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध हैं। 
  • 6. दुनिया को सर्जरी का ज्ञान भी बिहार से ही मिला: सर्जरी में सबसे विशेष विधा है-प्लास्टिक सर्जरी, उसके जन्मदाता सुश्रुत बिहार में पैदा हुए। सारी दुनिया के सर्जन उन्हें अपना पिता मानते हैं. ये हमारे लिए आत्मगौरव का विषय है और यह आत्मगौरव हमें राष्ट्र प्रेम की तरफ ले जाता है। प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक थे। वे आयुर्वेद के महान ग्रन्थ सुश्रुतसंहिता के प्रणेता हैं। इनको शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है। आज से लगभग 2500 साल पहले प्लास्टिक सर्जरी की थी !
  • 7. ‘कामसूत्र’ के रचयिता वात्स्यायन भी बिहार के ही रहने वाले थे :दुनिया में काम के महान ग्रंथ के तौर पर स्थापित ‘कामसूत्र’ के रचयिता वात्स्यायन भी बिहार के ही रहने वाले थे। कामसूत्र जिसकी रचना महर्षि वात्सायन ने की थी। हां, वहीं कामसूत्र जो दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब है। वात्स्यायन ऋषि ने इसे तीसरी शताब्दी के मध्य में लिखा था, इतिहासकारों के मुताबिक वात्स्यायन को लगा कि कामुकता के विषय पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना था कि इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। इस उद्देश्य से ही उन्होंने इस किताब की रचना की। उन्होंने अपने किताब के माध्यम से इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश की कि लोग इस संबंध में बेहतर जानकारी हासिल कर सकें।
  • 8.आर्यभट्ट भी बिहार के ही रहने वाले थे : दुनिया को गणित का ज्ञान देने वाले आर्यभट्ट भी बिहार के ही रहने वाले थे। प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। बिहार में वर्तमान पटना का प्राचीन नाम कुसुमपुर था। जहाँ उनका जन्म हुआ था। लेकिन यह विषय पर लोगो का अलग-अलग मत है। कुछ लोगो द्वारा बताया गया है की अब के कुसुमपुर जहाँ उनका जन्म हुआ वह महाराष्ट्र में है। विकिपीडिया के मुताबिक , इन्होंने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इसी ग्रंथ में इन्होंने अपना जन्मस्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 लिखा है।
  • 9. भारत के महान शासक चक्रवर्ती सम्राट अशोक बिहार के थे : बिहार के सम्राट अशोक को भारतीय इतिहास के महानतम शासक माने जाते हैं। अशोक चक्र ही भारतीय झंडे के केंद्र में है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक विश्व के सभी महान एवं शक्तिशाली सम्राटों एवं राजाओं की पंक्तियों में हमेशा शीर्ष स्थान पर ही रहे हैं। सम्राट अशोक ही भारत के सबसे शक्तिशाली एवं महान सम्राट है। सम्राट अशोक को ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है – ‘सम्राटों का सम्राट’, और यह स्थान भारत में केवल सम्राट अशोक को मिला है।
  • 10. सिख धर्म के आखिरी गुरु गुरुगोविंद सिंह का जन्म बिहार में ही हुआ: गुरु गोबिंद सिंह जीपटना में पैदा हुए जो दसवें सिख गुरु बने। पटना साहेब सिखों का एक पवित्र धर्मस्थल माना जाता है। वह औपचारिक रूप से नौ साल की उम्र में सिखों के नेता और रक्षक बन गए, जब नौवें सिख गुरु और उनके पिता गुरु तेग बहादुर औरंगजेब द्वारा इस्लाम में परिवर्तित होने से इनकार करने के लिए मार दिए गए थे। गुरु गोबिंद जी ने अपनी शिक्षाओं और दर्शन के माध्यम से सिख समुदाय का नेतृत्व किया और जल्द ही ऐतिहासिक महत्व प्राप्त कर लिया. वह खालसा को संस्थागत बनाने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी मृत्यु से पहले 1708 में गुरु ग्रंथ साहिब को सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ घोषित किया था।

बिहार की उपलब्धियां

बिहार की उपलब्धियां विश्व स्तर पर प्राचीन समय से ही रही है। जिसको इतिहास के पन्नो से कभी मिटाया नहीं जा सकता। प्राचीन समय में बिहार समृद्ध था। यह राज्य पवित्र गंगा घाटी में स्थित भारत का उत्तरोत्तर क्षेत्र था जिसका प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवमयी और वैभवशाली था। यहाँ ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व सभ्यता-संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त संसार आलोकित हुआ।

काल खण्ड के अनुसार बिहार के इतिहास को दो भागों में बाँटा जा सकता है- (।) पूर्व ऐतिहासिक काल, (॥) ऐतिहासिक काल।
विकिपीडिया के अनुसार , यह ऐतिहासिक काल अत्यन्त प्राचीनतम है जो ऐतिहासिक युग से करीब एक लाख वर्ष पूर्व का काल है। यह काल उत्तर वैदिक काल माना जाता है। बिहार में आर्यीकरण इसी काल से प्रारम्भ हुआ।

निष्कर्ष

अब यह 10 बिहार की उपलब्धियां देखकर खुद अंदाजा लगा सकते हैं। बिहार ने देश और दुनिया को क्या-क्या दिया। आज बिहार की ऐसी दुर्दशा क्यों है। इसके बारें में कमेंट में बताएं। मुझे तो बिहारी होने पर गर्व है। जिसने देश को प्राचीन समय से ही गौरवांवित किया है। देश के किसी हिस्सा से आप हैं। तो दोस्तों बिहार के नाम एक कमेंट तो बनता है।

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