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मेहमान के रूप में आप कहीं जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान।

यदि मेहमान के रूप में आप किसी दोस्त या रिश्तेदार के घर जाएं तो कुछ बातों का ध्यान रखें। जिससे मेज़बान को आपका का आना अखरे नहीं, बल्कि उनके मन में प्रसन्नता का भाव आए। आपने अक्सर देखा होगा कि बहुत ऐसे मेहमान होते हैं, जो कभी किसी के यहाँ जाते हैं, तो मेज़बान को उनका आना पसंद नहीं होता है। इसका मुख्य कारण जब कोई किसी के घर आता है और सामने वाले की सुविधा का ख़्याल नहीं रखता तो मेज़बान को उसका आना जरूर खलता है।

आपने संस्कृत की एक अच्छी पंक्ति अवश्य सुना होगा ‘अतिथि देवो भव:’ इसका मतलब होता है, अतिथि देव के रूप होते हैं।

मेहमान अर्थात अतिथि…अतिथि शब्द का प्रयोग उनके लिए होता था जो बिना तिथि के घर आते थे। प्राचीन काल से हमारे देश में अतिथि को देव समान पद परतिष्ठा मिलती थी, जो आज बदलते समय की धारा के साथ प्रवर्तित हो गयी है। लोग मेहमान के नाम सुनते ही दूर भागने लगते हैं। आज के युग में मेहमानो के आचरण व् व्यवहार में काफी फर्क आ गया है तो मेजबानों का बदलना कोई बड़ी बात नहीं।

मेहमान सिर्फ और सिर्फ अपनी मौज़ मस्ती और सैर सपाटा पर ध्यान देते है, जबकि मेजबान अकेले गृह कार्यो में लगे रहते है, बहुत तो ऐसे होते हैं जो अपनी फरमाइस पर फर्माइसे करते रहते हैं, ऐसे में भला कौन नहीं परेशान होगा। यदि आप भी कही दोस्त, रिस्तेदार या अन्य किसी के यहाँ मेहमान के रूप में आप जाए तो इन बातों को अमल में जरूर लाएं।

मेहमान के रूप में आप कहीं जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान

1. जाने के पूर्व सुचना दें –

कई बार ऐसा होता है, हमें किसी काम से दूसरे शहर जाना पड़ता है और किसी रिश्तेदार के घर रुकने की योजना बनाते हैं, तो उनके घर पहुंचने की पूर्व उन्हें सूचना देना चाहिए। बातों ही बातों में यह भी जानने कि कोशिश करना चाहिए कि कहीं उस दौरान वे व्यस्त तो नहीं।

मेहमान के रूप में आप अगर किसी के यहाँ बिना बताये जाते हैं तब ऐसा हो सकता है सामने वाले का अपना कोई प्लान हो, ऐसे में आपका ये सरप्राइज़ मेज़बान को ख़ुश नहीं करेगा।

2. स्वयं व्यवस्था करके पहुंचें –

मेज़बान के शहर में पहुंचते ही साधन की व्यवस्था का विशेष ध्यान रखें, एयरपोर्ट, स्टेशन या बस स्टैंड तक गाड़ी लेकर आने को न कहें। स्वयं अपनी व्यवस्था करके पहुंचें। वापसी में भी अपनी व्यवस्था से ही लौटें। अगर सामने वाला व्यक्ति व्यस्त नहीं है तो वो आपको लेने या छोड़ने खुद आ सकता है। लेकिन अगर ऐसा संभव नहीं है तो उम्मीद न रखें।

मेहमान के रूप में आप कहीं जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान

3. वाहन का उपयोग

मेहमान के रूप में आप खुद को शहर में नया बताकर अनावश्यक रूप से मेज़बान को हर जगह साथ चलने का आग्रह न करें, न ही उनके वाहन आदि का उपयोग करें। आजकल ऑनलाइन रिक्शा या टैक्सी काफ़ी आसानी से मिल जाती हैं। कोशिश करें कि आपके कारण मेज़बान को उनके कार्यालय वगैरह से छुट्टी न लेनी पड़े।

4. फरमाइशें न करें

सुबह उठकर संभव हो तो अपनी चाय-कॉफ़ी स्वयं बना लें, खाने-पीने को लेकर नखरे न करें, न ही बच्चों को करने दें। जैसे यदि भोजन में रोटी न बनी हो और आप उसकी मांग न कीजिए। अच्छे मेहमान बनने के लिए खाना बनाते समय, बर्तन धोते समय या टेबल लगाते समय मेजबान की मदद करने की पेशकश करें। भोजन के बाद मीठा खाने की आदत है तो मेहमान के रूप में आप फिज़ूल फरमाइशें करके सामने वाले के लिए मुश्किल पैदा न करें। इससे आपका आना सामने वाले को अखरेगा नहीं।

5. सामंजस्य बिठाएं

कुछ लोगों की आदत होती है कि वे देर रात तक टीवी देखते हैं या फिर मोबाइल चलाते हैं। दिनभर टीवी का रिमोट लेकर अपना मनपसंद चैनल देखते हैं। ऐसा न करें, दूसरों की पसंद का भी ख़्याल रखें। कई बार तो लोग टी.वी देखते-देखते फोन चलाने लगते हैं और टी.वी, पंखा चलता छोड़कर उठ जाते हैं या फोन आने पर बाहर जाकर बात करने लगते हैं। ऐसा करना ग़लत है। लाइट, पंखे, टी.वी, गीज़र, ए.सी. आदि खुले न छोड़ें। बाथरूम आदि का सलीक़े से उपयोग करें। ( मेहमान के रूप में आप ) बाथरूम संबंधित सभी कार्य सुबह जल्दी निबटा लें, ताकि घर के बाक़ी सदस्यों को समस्या न हो।

6. काम से काम रखें

कुछ लोग अपनत्व ज़ाहिर करने के लिए निजी बातें बताने लगते हैं व उम्मीद करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति भी अपनी व्यक्तिगत बातें उनके साथ साझा करे। मेज़बान की व्यक्तिगत व पारिवारिक बातों में दख़ल या सलाह मशविरा न दें। हो सकता है कि सामने वाले को ये पसंद न आए। इसलिए सामान्य बातचीत करें, ज़बरदस्ती निजी बातें जानने की कोशिश न करें।
उपरोक्त सभी बातों का यदि ध्यान रखेंगे तो वाक़ई आप बहुत अच्छे मेहमान साबित होंगे और एक सुलझा हुआ रिश्ता मेज़बान से बना पाएंगे।

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मेहमान के रूप में आप..ये भी जान लें…

मेज़बान के घर पहुंचने के पहले
  • मेज़बान के घर पहुंचने के पहले मेजबान परिवार के लिए कुछ मिठाईया और फ्रूट्स खरीद ले । जाते ही उनका अभिवादन स्वीकार करें और उनके परिवार का कुशलक्षेम पुछे।
  • यदि आपको मेजबान के बच्चे या वृद्ध के साथ कमरा साझा करना पड़े तो समस्या पैदा न करें। कोशिश करें उन्हें कम से कम दिक्कत हो।
  • बहुत जगह बाथरूम एक्स्ट्रा होते हैं, लेकिन यदि सिमित व्यवस्था है आपको बाथरूम साझा करना पड़े तो स्कूल जाने वाले बच्चे और ऑफिस जाने वाले सदस्य के बाद इस्तेमाल करें। क्योंकि उन्हें समय से जाना होता है। जब आप बाथरूम से बाहर आये तो यह कोशिश करें पहले से साफ़ हो।
  • घर के कामगारों पर अपना काम न लादें, न ही उनके काम में कोई टोका टाकी करें। अपने कपड़े वापस अपने घर आकर ही धोएं। जो कपड़े मेज़बान के घर धुल भी रहे हैं तो उन्हें सूखने के बाद स्वयं अपने सूटकेस में रख लें।
  • घर में आपको दिए गए कमरों का ही इस्तेमाल करें। कभी भी पर्दे के पीछे से झाँकने की कोशिश न करें। जिस कमरे में आप रह रहे हों उसे साफ़ रखिये और जाने के पहले बिस्तर को ठीक करें।
  • मेज़बान के साथ कहीं घूमने जा रहे हैं तो टिकट वगैरह स्वयं लें। टैक्सी का पेमेंट भी आप ही करें।
  • मेज़बान के घर दोस्तों या रिश्तेदारों को न बुलाए जरुरी हो तो खुद मिलने चले जाये। बिना अनुमति के उनके मोबाइल या टेलीफ़ोन का इस्तेमाल न करें। यदि ऐसा करना है तो मेज़बान की अनुमति अवश्य लें।
  • कमरे में घुसने के बाद अगर दरवाजा खुला है तो खुला रखे और अगर दरवाजा बंद है तो बंद रखे।
  • मेजबानों के बच्चे से बातचीत में सावधानी बरते, आलोचना से बचे। अगर हाल में मेजबान मुश्किल दौर से गुजरा है तो उनके सामने कामयाबियों की कहानी की चर्चा न करें। इसीप्रकार जब बुजुर्ग लोगों से बात करें तो उनके सामने बुढ़ापे में होने वाली परेशानी या मृत्यु जैसी कोई चर्चा न करें।
  • शॉपिंग करते समय मेज़बान या उनके बच्चों के लिए भी तोहफ़े अवश्य लें। धन्यवाद देने के साथ-साथ वापस आने के पहले मेज़बान को अपने घर पर आमंत्रित करना न भूलें।
  • मेज़बान को आपके आने का कारण बताने के साथ ही पूरी योजना भी बताएं, ताकि वे अपने रुटीन के साथ सामंजस्य बैठा सकें।
  • विदाई के वक्त मेजबानों से अनुमति लेकर और उनकी जानकारी में नौकरों तो टिप जरूर दें।
  • घर छोड़ते वक्त व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दें और घर पहुंचने के साथ ही अपनी सकुशल यात्रा की जानकारी दें। मेजबान को बताये की उनके यहाँ ठहरने के दौरान आपको कितना आनंद आया साथ ही आपके वजह से उन्हें जो असुबिधा हुयी इसके लिए खेद प्रकट कीजिए।

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अंत में – ये कैसा मेहमान

बात कुछ समय पहले की है, मैं अपने बहन के ससुराल में अपने भांजे के जन्मदिन के अवसर पर गया था। मैं अपने चचेरे भाई और अपने बहनोई के साथ एक शानदार शाम बिताये बातचीत में रात के 1 बज गए, मेरी एक कहानी समाप्त होती तो दूसरी शुरू हो जाती थी। कई उबासियों के वाबजूद जब मैंने ध्यान नहीं दिया तो बहनोई को आख़िरकार कहना पड़ा कि ‘ राघव जी सुबह मुझे बहुत जरुरी काम है ‘ फिर मेरे जबाव कुछ ऐसे थे – ओह झाजी मुझे लगा आप मेरे घर में हैं।

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