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सरोजिनी नायडू कौन थी | जीवन परिचय | शिक्षा |राजनीतिक सफ़र | अवार्ड

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इस पोस्ट में सरोजिनी नायडू कौन थी, इसके बारें में विस्तार से जानकारी दी गई है। जिसमें सरोजिनी नायडू के जीवन परिचय उनके जन्म, बचपन, शिक्षा, राजनीतिक सफ़र, अवार्ड और उनके मृत्यु आदि । विषयों पर मुख्य रूप से चर्चा की गई है।

भारत के स्वतंत्रता सेनानी और कवि सरोजिनी नायडू का जन्मदिन देश में एक महत्वपूर्ण उत्सव है। इस दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

सरोजिनी नायडू कौन थी

भारत कोकिला या नाइटेंगल आफ इंडिया कहलाने वाली सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थीं। आजादी के बाद वो पहली महिला राज्यपाल भी घोषित हुईं। सरोजिनी नायडू एक मशहूर कवयित्री, स्वतंत्रता सेनानी और अपने दौर की महान वक्ता भी थीं। इनके जन्म दिवस के रूप में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

Question-सरोजिनी नायडू कौन थी ?

सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय

सबसे पहले उनके बारें में कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं, जो सभी को जनाना चाहिए –

1.पूरा नाम सरोजिनी नायडू
2.उपनामनाइटिंगेल ऑफ इंडिया,भारत कोकिला
3.जन्म तिथि 13 फरवरी 1879
4.जन्म स्थान हैदराबाद
5.माता का नाम वरदा सुंदरी
6.पिता का नाम अघोरनाथ चट्टोपध्याय 
7.जीवनसाथीश्री मुत्तयला गोविंद राजुलु नायडु
8.शिक्षाHON. D. LITT.,
FELLOW OF THE ROYAL –
-SOCIETY OF LITT., 1914.
9.राजनीतिक सफ़र राज्यपाल
10.अवार्ड कैसर-ए-हिंद 
11.मृत्यु 2 मार्च 1949 (उम्र 70)
12.मृत्यु स्थानइलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय
13 feb : सरोजिनी नायडू जी के जयंती पर नमन
स्वतंत्रता आंदोलन में अहम् भूमिका निभाने वाली भारत कोकिला सरोजिनी नायडू जी के जयंती पर नमन।

भारत के स्वतंत्रता सेनानी और कवि सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में हुआ था। उनकी माता जी का वरदा सुंदरी ,जोकि उस समय के एक प्रसिद्ध बंगाली कवयित्री थीं। उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय थे। जो निजाम कालेज,हैदराबाद के संस्थापक और रसायन वैज्ञानिक भी थे।

सरोजिनी नायडू कुल आठ भाई-बहन में सबसे बड़ी थी। उनके एक भाई बीरेंद्रनाथ, जोकि एक क्रांतिकारी थे और तो दूसरे भाई हरिंद्रनाथ एक कवि, नाटककार और अभिनेता थे। सरोजिनी नायडू की बहन, सुनलिनी देवी भी एक नर्तकी और अभिनेत्री थीं।

सरोजिनी नायडू बचपन से मेधावी छात्रा थी। 12 साल की उम्र में, सरोजिनी नायडू ने मद्रास विश्वविद्यालय में मैट्रिक की परीक्षा में टॉप कर ख्याति प्राप्त की। विश्वविद्यालय में उन्हें शब्दों की जादूगरनी कहा जाता था। कम उम्र में ही उन्होंने कई भाषाओ पर अपनी पकड़ बना ली। वो उर्दू, तेलुगु, अंग्रेजी, बंगाली और फारसी में कुशल छात्रा थीं।

पिता चाहते थे कि वो अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद, गणितज्ञ या वैज्ञानिक बनने के लिए आगे की पढाई करे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं, उनकी रूचि कविता रचना में आने लगी। उन्होंने अंग्रेजी में कविता लिखना शुरू कर दिया।

सरोजिनी नायडू ने मात्र 13 वर्ष की आयु में ही 1300 पदों की ‘झील की रानी‘ नामक लंबी कविता और लगभग 2000 पंक्तियों का एक विस्तृत नाटक लिखकर अंग्रेजी भाषा पर अपनी पकड़ का उदाहरण दिया था। उनके कविता से हैदराबाद के निजाम बहुत प्रभावित हुए और उन्हें उन्हें विदेश में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप दी। वह पहले किंग्स कॉलेज लंदन और फिर गिर्टन कॉलेज, कैम्ब्रिज में पढ़ने के लिए इंग्लैंड चली गईं।

सरोजिनी नायडू को शब्दों की जादूगरनी कहा जाता था. वह बहुभाषाविद थीं.
वह क्षेत्रानुसार अपना भाषण अंग्रेज़ी, हिन्दी, बंगला या गुजराती भाषा में देती थीं !
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सरोजिनी नायडू का वैवाहिक जीवन

डॉ. गोविंदराजुलु नायडू एक दक्षिण भारतीय और एक गैर-ब्राह्मण, फौजी डाक्टर थे।, जिन्होंने तीन साल पहले सरोजिनी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था। लेकिन सरोजिनी के पिता इस अंर्तजातीय विवाह के विरुद्ध थे।

किन्तु, जिस समय सरोजिनी नायडू इंग्लैंड से लौटी उस समय वह डॉ. गोविन्दराजुलु नायडू के साथ विवाह करने के लिए उत्सुक थीं। इसीलिए बाद में यह सम्बन्ध पिता द्वारा तय कर दिया गया।

सरोजिनी नायडू जी का विवाह 19 वर्ष की आयु में डॉ. मुथ्याला गोविंदराजुलु नायडू से हुआ। उस समय अंर्तजातीय विवाह की सामाजिक अनुमति नहीं होती थी। जिस कारण उनका विवाह 1898 में मद्रास में ब्रह्म विवाह अधिनियम (1872) के तहत हुआ।

सरोजिनी नायडू का वैवाहिक जीवन खुशहाल था । उनके चार बच्चे जयसूर्या, पद्मज, रणधीर और लीलामणि थे ! उन्होंने स्नेह और ममता के साथ अपने चार बच्चों की परवरिश की !

सरोजिनी नायडू का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

सरोजिनी नायडू के राजनीती में सक्रिय होने में गोखले जी का 1906 कोलकत्ता अधिवेशन के भाषण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसमें उन्होंने भारतीय समाज में फैली कुरूतियों के लिए भारतीय महिला को जागृत किया था। नायडू गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिज्ञ पिता मानती थी।

हैदराबाद में उनके द्वारा किये गये बाढ़-राहत कार्यो के लिए उन्हें 1908 में स्वर्ण कैसर-ए-हिन्द के पदक से सम्मानित किया गया। जोकि जलियांवाला बाग़ नरसंहार के बाद लौटा दी।

भारत के सभी स्वतंत्रता आंदोलनों में अपना सहयोग दिया। 1903 से 1917 के बीच वो टैगोर, नेहरू, गाँधी और अन्य हस्तियों से मिली। भारत छोडो आंदोलन में उन्हें सजा हुई , भारत में उनकी ब्रिटिश-विरोधी गतिविधियों के चलते उन्‍हें कई बार जेल जाना पड़ा। 1930, 1932 और 1942-43 में उन्‍हें जेल की सजा दी गईं। उनके विनोदी स्वस्भाव के कारण गाँधी के लघु दरबार में उन्हें विदूषक भी कहा जाता था।

युवाओं में राष्ट्रीय भावनाओं के जागरण के लिए 1915 से 1918 तक एनी बेसेंट और अय्यर के भारत भ्रमण की। 1919 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में गाँधी जी के विस्वसनीय सहयोगी थी। होमरूल के मुद्दे को लेकर 1919 में वो इंग्लैंड भी गई। 1922 में उन्होंने खादी पहनने का व्रत लिया। 1922-26 में भारतीयों के समर्थन में आंदोलनरत रही और 1928 में गांधीजी के प्रतिनिधि के रूप में अमेरिका गई।

वैसे जब देश में आजादी के साथ भड़की हिंसा को शांत कराने का प्रयत्न महात्मा गांधी कर रहे थे, उस वक्त सरोजिनी नायडू ने उन्हें ‘शांति का दूत’ कहा था और हिंसा रुकवाने की अपील की थी ! सरोजिनी नायडू 1925 में कांग्रेस के कानपुर अधिवेशन में कांग्रेस की दूसरी महिला अध्यक्ष बनीं ! वे भारत की पहली महिला गवर्नर भी थीं ! आजादी के बाद उन्हें संयुक्त प्रांत का राज्यपाल बनाया गया था !

सरोजिनी नायडू को क्यों कहते हैं ‘ द नाइटिंगेल ऑफ इंडिया

सरोजिनी नायडू को क्यों कहते हैं ' द नाइटिंगेल ऑफ इंडिया '
image : wikipedia

गांधीजी ने उनके भाषणों से प्रभावित होकर उन्हें ‘भारत कोकिला’ की उपाधि दी थी ! लेकिन वो अपने पत्रों में उन्हें कभी-कभी ‘डियर बुलबुल’,’डियर मीराबाई’ तो यहां तक कि कभी मजाक में ‘अम्माजान’ और ‘मदर’ भी लिखते थे ! मजाक के इसी अंदाज में सरोजिनी भी उन्हें कभी ‘जुलाहा’, ‘लिटिल मैन’ तो कभी ‘मिकी माउस’ संबोधित करती थीं !

सरोजिनी नायडू के बेहतरीन कोट्स ( सुविचार )

हम अपनी बीमारी से भारत को साफ करने से पहले पुरुषों की एक नई नस्ल चाहते हैं।

– सरोजिनी नायडू

एक देश की महानता,बलिदान और प्रेम उस देश के आदर्शों पर निहित करता है।

– सरोजिनी नायडू

हम गहरी सच्चाई का मकसद चाहते हैं, भाषण में अधिक से अधिक साहस और कार्यवाही में ईमानदारी।

– सरोजिनी नायडू

“श्रम करते हैं हम कि समुद्र हो तुम्हारी जागृति का क्षण, हो चुका जागरण अब देखो, निकला दिन कितना उज्ज्वल”

– सरोजिनी नायडू

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